ब्रह्मा गायत्री मंत्र
ॐ वेदात्मनाय विद्महे । हिरण्यगर्भाय धीमहि । तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ॥
अर्थ: हम वेद-स्वरूप परमात्मा को जानने का प्रयास करते हैं, हिरण्यगर्भ का ध्यान करते हैं — वे हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
हर मंत्र का मूल संस्कृत पाठ केवल तभी प्रकाशित होता है जब वह विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित हो — कोई अनुमानित अथवा "पूर्ण की गई" पंक्ति नहीं (देखें Master Prompt Section 20)।
ॐ वेदात्मनाय विद्महे । हिरण्यगर्भाय धीमहि । तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ॥
अर्थ: हम वेद-स्वरूप परमात्मा को जानने का प्रयास करते हैं, हिरण्यगर्भ का ध्यान करते हैं — वे हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
ॐ नारायणाय विद्महे । वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥
अर्थ: हम नारायण को जानने का प्रयास करते हैं, वासुदेव का ध्यान करते हैं — वे विष्णु हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
ॐ नमो नारायणाय ॥
अर्थ: मैं नारायण को नमन करता हूँ — वैष्णव परंपरा का सर्वाधिक प्रचलित आठ-अक्षर मंत्र।
ॐ नमः शिवाय ॥
अर्थ: मैं शिव को नमन करता हूँ — शैव परंपरा का सबसे मूल, केंद्रीय मंत्र।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
अर्थ: हम त्रिनेत्रधारी शिव की उपासना करते हैं — वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें। ऋग्वेद 7.59.12 का यह स्तोत्र "वेदों का हृदय" भी कहलाता है।
ॐ गं गणपतये नमः ॥
अर्थ: हे गणपति! आपको नमस्कार — "गं" स्वयं गणेश का बीज मंत्र है।
ॐ एकदन्ताय विद्महे । वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
→ संपूर्ण आरती, चालीसा एवं संकटनाशन स्तोत्र गणेश जी के पेज पर देखें
ॐ सरवणभवाय नमः ॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे । महासेनाय धीमहि । तन्नो स्कन्दः प्रचोदयात् ॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥ · महालक्ष्मी गायत्री: ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे । विष्णुपत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॥ · वंदना: या कुन्देन्दुतुषारहारधवला... (पूर्ण पाठ सरस्वती-पेज पर)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ · या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
ॐ क्रीं कालिकायै नमः ॥
पार्वती · लक्ष्मी · सरस्वती · दुर्गा · काली — पूर्ण संदर्भ एवं साधना-मर्यादा टिप्पणियाँ प्रत्येक पेज पर
ॐ श्रीराधायै नमः ॥ · व्रज-सम्बोधन: राधे राधे ॥
ॐ हं हनुमते नमः ॥ · मनोजवं मारुततुल्यवेगं... (पूर्ण वंदना हनुमान-पेज पर)
श्री राम जय राम जय जय राम ॥ · ॐ श्री रामाय नमः ॥ · रामरक्षा-श्लोक: रामो राजमणिः सदा विजयते... (राम-पेज पर)
ॐ श्री सीतायै नमः ॥ · युगल: श्री सीतारामाय नमः ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ (द्वादशाक्षर) · हरे कृष्ण महामंत्र · गीता 4.7-8 (कृष्ण-पेज पर)
राधा · हनुमान · राम · सीता · कृष्ण — पूर्ण संदर्भ प्रत्येक पेज पर
जयदेव के गीतगोविंद दशावतार-स्तोत्र की संबंधित अष्टपदी प्रत्येक अवतार-पेज पर अर्थ-सहित दी गई है।
ॐ मत्स्यरूपाय नमः ॥ · प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदम्... (मत्स्य-पेज पर)
ॐ कूर्मरूपाय नमः ॥ · गीता 2.58 कूर्म-उपमा (कूर्म-पेज पर)
ॐ वराहरूपाय नमः ॥ · वसति दशनशिखरे धरणी तव लग्ना... (वराह-पेज पर)
ॐ नृसिंहाय नमः ॥ · उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥
ॐ वामनाय नमः ॥ · ॐ त्रिविक्रमाय नमः ॥ · ऋग्वेद 1.22.17: इदं विष्णुर्वि चक्रमे... (वामन-पेज पर)
मत्स्य · कूर्म · वराह · नृसिंह · वामन — पूर्ण संदर्भ एवं साधना-मर्यादा टिप्पणियाँ प्रत्येक पेज पर
ॐ परशुरामाय नमः ॥ · अग्रतः चतुरो वेदाः पृष्ठतः सशरं धनुः... (भार्गव-उद्घोष — परशुराम-पेज पर)
जयदेव-अष्टपदियाँ: "निन्दसि यज्ञविधेः..." (बुद्ध) · "म्लेच्छनिवहनिधने..." (कल्कि) · "वहसि वपुषि विशदे..." (हलधर) — अर्थ-सहित अपने-अपने पेज पर; ॐ कल्किने नमः ॥ · ॐ संकर्षणाय नमः ॥
ॐ नटराजाय नमः ॥ · चिदम्बरेश-ध्यान: कृपासमुद्रं सुमुखं त्रिनेत्रं... (नटराज-पेज पर)
ॐ कालभैरवाय नमः ॥ · कालभैरवाष्टकम्: देवराजसेव्यमान... (गुरु-गम्य तांत्रिक बीज नियमानुसार अप्रकाशित)
वागर्थाविव संपृक्तौ... जगतः पितरौ वन्दे (कालिदास) · मौनव्याख्याप्रकटित... दक्षिणामूर्तिमीडे (ध्यान-श्लोक)
मोहिनी-उपासना विष्णु-मंत्रों से (शान्ताकारं...) · ॐ गं गणपतये नमः ॥ + वक्रतुण्ड महाकाय... (अष्टविनायक-पेज पर)
परशुराम · बुद्ध · कल्कि · बलराम · नटराज · भैरव · अर्धनारीश्वर · दक्षिणामूर्ति · मोहिनी · अष्टविनायक — पूर्ण संदर्भ प्रत्येक पेज पर
नवग्रह-पेजों पर व्यास-परंपरा के नवग्रह-स्तोत्र का संबंधित श्लोक अर्थ-सहित दर्ज है; वैदिक पेजों पर मूल-ऋचाएँ।
इन्द्रस्य नु वीर्याणि प्र वोचम्... (ऋग्वेद 1.32.1) · अग्निमीळे पुरोहितम्... (1.1.1) · नमस्ते वायो! त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि (तैत्तिरीय) · शं नो मित्रः शं वरुणः + उदुत्तमं वरुण पाशम्... (क्षमा-धारा)
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ · जपाकुसुमसंकाशं... (नवग्रह-स्तोत्र)
दधिशंखतुषाराभं... · धरणीगर्भसम्भूतं... · प्रियंगुकलिकाश्यामं... · देवानां च ऋषीणां च... · हिमकुन्दमृणालाभं... — पाँचों ग्रह-श्लोक अर्थ-सहित अपने-अपने पेज पर
इन्द्र · अग्नि · वायु · वरुण · सूर्य · चन्द्र · मंगल · बुध · गुरु · शुक्र — पूर्ण संदर्भ प्रत्येक पेज पर
नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्... · अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्... · पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्... — तीनों श्लोक अर्थ-सहित अपने-अपने पेज पर; नवग्रह-स्तोत्र के नौ ग्रह-श्लोक अब कोश में पूर्ण।
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत... (कठोपनिषद — यम-वाणी) · ईशानः सर्वविद्यानामीश्वरः सर्वभूतानाम्... (तैत्तिरीय आरण्यक) · ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय... (तंत्रसार-परंपरा, स्तर-चिह्नित)
गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥ · नमामि यमुनामहं सकलसिद्धिहेतुं मुदा... (यमुनाष्टक) · त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवि नर्मदे ॥ · माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः ॥ (अथर्व 12.1.12)
शनि · राहु · केतु · यम · कुबेर · ईशान · निर्ऋति · गंगा · यमुना · नर्मदा · हिमवान · पृथ्वी
देवी कवच का क्रम-श्लोक ("प्रथमं शैलपुत्री च...") शृंखला-आधार है; प्रत्येक रूप का प्रचलित ध्यान-श्लोक (पूजा-परंपरा — ग्रेड B चिह्नित) अर्थ-सहित उसके पेज पर। विशेष: कात्यायनी का व्रत-मंत्र (भागवत 10.22.4) नवदुर्गा-मंडल का एकमात्र मूल-संहिता मंत्र है।
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि । नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥ (भागवत 10.22.4)
शैलपुत्री · ब्रह्मचारिणी · चन्द्रघण्टा · कूष्माण्डा · स्कन्दमाता · कात्यायनी · कालरात्रि · महागौरी — पूर्ण संदर्भ प्रत्येक पेज पर
नवदुर्गा-पूर्ति, तीन युगल-पृष्ठ और तीन लोक-देव प्रविष्टियों के मंत्र-खंड — प्रत्येक अर्थ एवं स्रोत-ग्रेड सहित उसके पेज पर। विशेष: महामंत्र (कलिसंतरण उपनिषद्) का गौड़ीय राधा-अन्वय D082 पर; "स्वामिये शरणम् अय्यप्पा" शरण-घोष और तत्त्वमसि (छांदोग्य 6.8.7) D089 पर; शीतलाष्टक ध्यान-श्लोक D092 पर।
सिद्धिदात्री · राधा-कृष्ण · सीता-राम · लक्ष्मी-नारायण · अयप्पा · शीतला · संतोषी माता — पूर्ण संदर्भ प्रत्येक पेज पर
महाविद्या-मंडल की गुरु-गम्यता नीति (बीज-मंत्र अप्रकाशित) प्रत्येक पेज पर घोषित है; प्रकाशित शब्दशः रत्न: गायत्री-महामंत्र (ऋग्वेद 3.62.10 — D081), शरणागति-महावाक्य (युद्धकांड 18.33 — D100), "द्वा सुपर्णा" (ऋग्वेद 1.164.20 — D096), "वागर्थाविव" (रघुवंश 1.1 — D085), अन्न-ब्रह्म सूत्र (तैत्तिरीय 3.2 — D080), "अनन्तश्चास्मि नागानाम्" (गीता 10.29 — D095), सात्त्विक-तप त्रयी (गीता 17.14-16 — D075), चिरंजीवी-श्लोक (D100)।
काली-मा. ·
तारा ·
ललिता ·
भुवनेश्वरी ·
छिन्नमस्ता ·
भैरवी ·
धूमावती ·
बगलामुखी ·
मातंगी ·
कमला
अन्नपूर्णा ·
गायत्री ·
उमा-महेश्वर ·
जगन्नाथ ·
वेंकटेश्वर ·
विठोबा ·
खंडोबा ·
मनसा
वासुकि ·
शेष ·
गरुड़ ·
नंदी ·
जटायु ·
सुग्रीव ·
विभीषण — पूर्ण संदर्भ प्रत्येक पेज पर
आगे: प्रत्येक नए देवता के प्रकाशित होने पर उनके सत्यापित मंत्र यहाँ जुड़ेंगे, देवता / प्रकार / परंपरा अनुसार फ़िल्टर सहित (Master Prompt Section 77)।